फ्लोटाफ क्रूजेस’ ने गंगा की लहरों पर उभरी सफलता की कहानी
पटना, बिहार: गंगा नदी, जो सदियों से बिहार की जीवनरेखा रही है, आज एक नई पहचान के साथ उभर रही है। राज्य में ‘फ्लोटाफ क्रूजेस’ नामक पहल ने न केवल रिवर टूरिज्म को नई दिशा दी है, बल्कि स्वदेशी तकनीक और स्थानीय प्रतिभा की ताकत को भी साबित किया है। करीब पांच वर्षों के भीतर यह पहल एक साधारण लकड़ी की नाव से शुरू होकर गंगा के बीच तैरते शानदार “फ्लोटेल” तक पहुंच गई है। यह यात्रा संघर्ष, नवाचार और दूरदृष्टि का अनूठा उदाहरण मानी जा रही है।
,  
,  फ्लोटाफ क्रूजेस के संस्थापक प्रणव साही ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपने को साकार किया। गंगा किनारे बीता उनका बचपन और पारिवारिक नाव की विरासत उनके लिए प्रेरणा बनी। तकनीकी संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के ज्ञान का उपयोग कर नाव निर्माण में नई राह निकाली। साल 2011 में उन्होंने पहली स्वदेशी लकड़ी की नाव तैयार की, जो स्थानीय कारीगरों और संसाधनों से बनी थी। यही प्रयास आगे चलकर एक बड़े उद्यम की नींव साबित हुआ।
,  
,  इस सफलता की कहानी में सुमिता साही की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। पेशे से फिल्ममेकर सुमिता ने फ्लोटाफ को सिर्फ एक पर्यटन सेवा नहीं, बल्कि एक अनुभव के रूप में विकसित किया। उन्होंने ब्रांडिंग, डिजाइन और ग्राहक अनुभव को इस तरह तैयार किया कि हर यात्रा गंगा की संस्कृति और कहानी को दर्शाती है।
,  
,  कोविड-19 महामारी के दौरान प्रणव साही ने अपने बेटे के लिए एक यॉट डिजाइन किया, जो बाद में व्यवसायिक रूप में इस्तेमाल होने लगा। NIT घाट, पटना से इसकी शुरुआत हुई और यहीं से बिहार में रिवर क्रूज टूरिज्म को नई गति मिली।
,  फ्लोटाफ की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘फ्लोटेल’ है — गंगा के मध्य स्थित तैरता होटल, जिसमें आधुनिक सुविधाएं जैसे एयर कंडीशंड कमरे, सोलर पावर, प्रोफेशनल किचन और ओपन डेक शामिल हैं। यह परियोजना स्वदेशी इंजीनियरिंग और डिजाइन का बेहतरीन उदाहरण है।
,  
,  फ्लोटाफ क्रूजेस ने न केवल पर्यटन को बढ़ावा दिया है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
,  नई पहचान बना बिहार
,  आज फ्लोटाफ क्रूजेस बिहार में गंगा पर्यटन का प्रतीक बन चुका है। यह पहल दिखाती है कि कैसे स्थानीय सोच, तकनीकी नवाचार और रचनात्मक दृष्टिकोण मिलकर एक राज्य की पहचान बदल सकते हैं।
,  फ्लोटाफ क्रूजेस की कहानी केवल एक व्यवसाय की सफलता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, नवाचार और सांस्कृतिक गौरव की मिसाल है — जहां गंगा की लहरों पर सपनों ने नई उड़ान भरी है।