"क्रॉसरोड्स: भारत में दलित ईसाइयों के भुला दिए गए संघर्ष की कहानी है
नई दिल्ली – भारत के ईसाई समुदाय का एक बड़ा और ऐतिहासिक रूप से हाशिये पर खड़ा हिस्सा—दलित धर्मांतरित—आज भी उपहास, भेदभाव और व्यवस्थागत उपेक्षा का शिकार है। न सरकार ने उनकी आवाज़ सुनी, न ही संस्थागत चर्च ने उनके घाव भरे।
,  सदियों पुराने जातिगत उत्पीड़न से मुक्ति की तलाश में, इन लोगों ने ईसाई धर्म अपनाया, यह सोचकर कि यहां उन्हें समानता और गरिमा मिलेगी। लेकिन इस परिवर्तन की भारी कीमत चुकानी पड़ी—उन्होंने अपना आरक्षण का संवैधानिक अधिकार खो दिया। और विडंबना यह कि चर्च भी उनके सामाजिक उत्थान और अधिकारों की लड़ाई में अक्सर मौन या निष्क्रिय रहा।
,   फिल्म के निर्देशक राम भारती ने कहा,"यह कहानी सिर्फ दलित ईसाइयों की नहीं, बल्कि इंसाफ और समानता की वैश्विक लड़ाई का हिस्सा है। हमने इसे सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के लिए बनाया है, ताकि हर कोई समझ सके कि धर्म परिवर्तन के बाद भी जाति की जंजीरें इन लोगों को कैद किए हुए हैं।"
,  राहुल देवान ने कहा,"चर्च ने इन गरीब हिंदुओं के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। उनका संवैधानिक हक भी छीन लिया और उनके विकास के लिए कुछ नहीं किया। आज ज़रूरत है कि दुनिया इनकी आवाज़ सुने और इनके अधिकार दिलाने के लिए कदम उठाए।"
,  वैश्विक प्रस्तुति: "क्रॉसरोड्स: आस्था, जाति और न्याय की लड़ाई” को दुनिया भर के फिल्म फेस्टिवलों, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स और विशेष स्क्रीनिंग्स में दिखाया जाएगा। उद्देश्य है—इन आवाज़ों को वैश्विक मंच तक पहुँचाना और उन्हें वह सम्मान दिलाना जिसके वे हकदार हैं।
,  रिलीज़ डेट: फिल्म का विश्व प्रीमियर April 2026 में निर्धारित है और यह कई भाषाओं में उपलब्ध होगी, ताकि इसका संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे।